UPVP- Introduction

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राजनीती नहीं कार्यनीति

An Initiative By Ex – Corporate Management Professionals.

उत्तर प्रदेश ! एक ऐसा प्रदेश जो सदियों से विश्व के तमाम प्रश्नो के उत्तर देता रहा है,एक ऐसा प्रदेश जिसने संपूर्ण विश्व को विकास के  लिए मार्ग दर्शित किया ! आज वही उत्तर प्रदेश विकास  के विभिन्न मानदंडो पर खुद एक प्रश्न बन गया है ! ऐसा क्यों ?

उत्तर प्रदेश, एक ऐसा प्रदेश जिसने विश्व को अनेको विकास पुरुष दिए है – राम,कृष्णा से ले कर नेहरू,लालबहादुर शास्त्री,इंदिरा गांधी   से लेकर, देश के ८ से ज्यादा प्रधान मंत्री दिए (तत्कालीन प्रधान मंत्री बी उत्तर प्रदेश के वाराणसी सीट से है ),उत्तर प्रदेश एक ऐसा प्रदेश जो संसद में सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाता है,और सरकार चाहे जिसकी भी हो,उत्तर प्रदेश के  ८० सांसद हमेशा उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व केंद्र सरकार में  करते है ,फिर भी उत्तर प्रदेश आज भी विकास से कोसो दूर है !

हमारे देश / प्रदेश की राजनैतिक पार्टिया राजनीती करने में कुशल है  पर क्या कभी उत्तर प्रदेश को जापान , सिंगापुर जैसा विकसित राज्य बना सकते है ? अगर पिछले ६० सालो में अभी तक सारी पार्टिया मिलकर नहीं कर पाये तो आगे कैसे कर लेंगे ? और पिछले ६० सालो से, आजादी के बाद से अब  तक क्या इनके पास कोई रड़नीतिक योग्यता और क्षमता है की वो उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रदेश का प्रबंधन कुशलता पूर्वक कर सके ?

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किसी भी देश / प्रदेश का विकास करने के लिए  बेहद कुशल प्रबंधन की आवश्यकता होती है ! राजनितिक कुशलता विकास करने की योग्यता  का मापदंड कभी नहीं हो सकता है ! यह जरुरी नहीं है जो व्यक्ति / राजनैतिक पार्टी राजनीती में बेहद प्रवीण  है वो विकास जैसे जटिल विषय में भी दक्ष हो ! विकास करने के लिए कुछ बेहद जटिल सुक्ष्म स्तरीय योग्यता की आवश्यकता होती है ! दुर्भाग्य से हम केवल राजनैतिक योग्यता का ही प्रदर्शन करते है और उसी मापदंड पर भविष्य के विकास पुरुषो ” का चुनाव करते है जिनके अंदर विकास को लेकर कोई योग्यता नहीं होती है !

क्या कभी इन नेताओ के पास राजनीती के अलावा राज्य की प्रगति के लिए कोई “कार्यनीति” है ? क्योकि केवल कुशल “कार्यनीति” से ही किसी देश  का विकास संभव हो सकता है ! विगत वर्षो में जिन देशो ने प्रगति की है, वो उनकी कुशल “कार्यनीति” की बदौलत ही संभव हो सका है! केवल राजनीती से तो व्यतिगत राजनितिक स्वार्थो की पूर्ति हो सकती है,राजनीती से सरकार बनायीं और बिगाड़ी जा सकती है ! राजनीती अगर चुनाओ के वक़्त किया जाये तो बेहतर है,चुनाओ के बाद तो “कार्यनीति” पर अमल होना चाहिए जबकि यहाँ केवल राजनीती होती है -चुनाओ के पहले और चुनाओ के बाद भी. विकास कैसे संभव है ? यही कारड है की छोटे-छोटे देश आगे बढ़ गए और भारत आज भी विकास के प्रतीक्षा में  कभी किसी राजनैतिक पार्टी तो कभी किसी राजनैतिक पार्टी की राह देखता रहता है.

भारत / उत्तर प्रदेश के वास्तविक और वैश्विक विकास के लिए जरुरी है की राजनीती की जगह “कार्यनीति” को चुना जाये | जिन राजनैतिक पार्टियो के पास कोई कुशल “कार्यनीति” नहीं है ,उनके हाथो में सत्ता की बागडोर न दी जाये वरना विकास संभव नहीं है.
इसी वस्तुस्थिति को ध्यान में रखते हुए “उत्तर प्रदेश विकास पार्टी” ने राजनीती की जगह “कार्यनीति” के मंत्र को अपना आधार बनाया है .

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जरा सोचिये ! आजादी के ६० साल बाद भी उत्तर प्रदेश आज भी “बीमारू राज्य” क्यों घोषित है ?

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सोचे और अपना जवाब दे और २०१७ के इलेक्शन में उत्तर प्रदेश का “Face & Fate” दोनों उत्तर प्रदेश विकास पार्टी …..के साथ बदले !

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पहचानिये अपनी ताक़त  को

 – उत्तर प्रदेश भविष्य की एक बहुत बड़ी वैश्विक अर्थव्यस्था (Global Economy) का आधार  बन सकता है ! एक बहुत बड़ा जन संसाधन / – मानव संसाधन / बुद्धिजीविक संसाधन हमारे पास है जो देश और विदेशो में फैला है  !

-उत्तर प्रदेश की स्थापना 1st अप्रैल , 1937  को United Province के नाम से हुई थी जो १९५० में बदलकर उत्तर प्रदेश कर  दिया गया !
– उत्तर प्रदेश को अगर हटा दिया जाये तो भारत सांस्कृतिक रूप से आत्मा विहीन हो जायेगा क्योकि भारीतय संस्कृति  का आधार  राम और कृष्णा से है !

-धार्मिक, सांस्कृतिक  और इतिहासिक आधार पर उत्तर प्रदेश वैश्विक पर्यटन (Global Tourism) का केंद्र बन सकता है. प्रयाग,वाराणसी,सारनाथ,आगरा,मथुरा, आदि प्रसिद्ध स्थल केवल उत्तर प्रदेश में ही है !
– विश्व की सबसे प्राचीन नगरी  वाराणसी है जो की भारत की सांस्कृतिक राजधानी भी कहलाती है !
– उत्तर प्रदेश अगर एक अलग देश होता तो जनसँख्या के हिसाब से  ये  विश्व  का ये पाचवा बड़ा देश होता !
– उत्तर प्रदेश में शिक्षा की दर ६८% है !
– भारत के ५५२ संसदीय सीटो में ८० सीट (१४.५%) उत्तर प्रदेश से आती है !
– उत्तर प्रदेश की जनसँख्या लगभग २० करोड़ है जो पुरे देश की जनसँख्या का २० % है ! इस हिसाब से उत्तर प्रदेश भारत और दुनिया के लिए  एक बहुत बड़ा उपभोक्ता बाजार है !
– उत्तर प्रदेश भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था है और इसकी जीडीपी ९७६३ बिलियन रुपीस  है !
– भारत का ७०% गन्ना उत्तर प्रदेश से आता है ! और गेहू,बाजरा,ज्वार,चना,आलो,दाल के उत्पादन में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है !
– टेलीकॉम रेगुलेटर के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्षा २०१३ में  सबसे ज्यादा मोबाइल फ़ोन कनेक्शन १२१.६० मिलियन थे जबकि पुरे देश में ८८६१.६६ मिलियन मोबाइल फ़ोन थे !

No Political Party, No Corporate House,No Country of World Can Ignore The Importance Of Uttar Pradesh Due To It’s Huge   Political / Business Potentials. Wake UP Now .

उत्तर प्रदेश ने देश को सर्वाधिक  प्रधान मंत्री दिए है — जवाहर लाल  नेहरू फूलपुर से ,लाल बहादुर शास्त्री अल्लाहाबाद से ,इंदिरा गांधी राय बरेली  से , राजीव गांधी अमेठी से,वी पी सिंह फतेहपुर से,चंद्रशेखर बलिया से,अटल बिहारी बाजपेयी लखनऊ से , नरेंद्र मोदी वाराणसी से !

फिर भी उत्तर प्रदेश एक बीमारू राज्य है !

आखिर क्यों ?

जरुरत है तो केवल

“राजनीती नहीं कार्यनीति” की

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“चाय पर  चर्चा” नरेंद्र मोदी जी ने की , परचा पर चर्चा नितीश जी  बिहार में  कर रहे है !

  “खर्चा पर चर्चा” कौन करेगा ?

UPVP संपूर्ण भारत और उत्तर प्रदेश में “खर्चा पर चर्चा” सुरु करने जा रही है !
क्या किसी राजनेता  / मीडिया चैनल / राजनैतिक पार्टी के अंदर दम है  ?

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